Ramsnehi Sampraday

Author name: Editorial Team

द्वितीय आचार्य श्री दूल्हेरामजी महाराज

द्वितीय आचार्य श्री दूल्हेरामजी महाराज जयपुर नरेष श्री माधवसिंह जी के दीवान श्री हरिगोविन्द जी खण्डेलवाल वैष्य, गौत्र नाटानी की सुपुत्र के साथ हुआ। समय पाकर जेष्ठ सुदी 11 सं. 1813 में उनके एक पुत्र हुआ जिसका नाम दल्लाजी रखा। धीरे धीरे आप बडे हुए, पढ लिख कर योग्य बने एवं व्यापार करने लगे। एक […]

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वीतराग स्वामी जी श्री रामजन्न जी महाराज

वीतराग स्वामी जी श्री रामजन्न जी महाराज श्री रामजन्न जी महाराज का जन्म स. 1801 में सरस्या ग्राम के एक माहेष्वरी लड्डा परिवार में हुआ। सं. 1824 में आपने भीलवाडा में वैराग्य धारण किया। आपको वाणी में ऐसा संकेत मिलता हैः- मुलक जहां मेवाड है, पुर भीलवाडो जान। रामचरण प्रगट भये, पूरण ब्रह्मा प्रमाण।।                                    

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Swami Ramcharan ji Maharaj Jeevan Parichay

            स्वामी जी श्री रामचरण जी महाराज निर्गुण भक्ति चहुं दिषि नहीं, नहीं राम का जाप। जिनकूं परगट करन कूं, आये आपों आप।। अर्जुन को उपदेष देते हुए गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है –             परित्राणाय साधूनां,                          विनाषाय च दुष्कृताम्।                 धर्मसंस्थपनार्थाय, संभवामी युगे युगे।। अर्थात् सज्जनों की रक्षा करने के

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श्री चत्रदास जी महाराज की आरती

श्री चत्रदास जी महाराज की आरती ऐसी आरती करो मन भाई, गुरू गोविन्द में सब सध जाई।।टेर।। गुरू मूरति सूरति पहिचानी, यह आरती निर्दोष करानी।।1।। रमताराम अमूरति स्वामी, सब घट व्यापक अन्र्तयामी।।2।। नाम रूप यह आरती कीजै, चत्रदास भव संकट छीजै।।3।।

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श्री दर्शनरामजी महाराज की आरती

श्री दर्शनरामजी महाराज की आरती आरती राम गुरू की कीजै,  जनम मरण भव बंधन छीजे।।टेर।। राम राम रट भाव बधावे,  सबही ते निर्वर रहावे।।1।। दया शील सन्तोष विचारो, पर उपकार धारना धारो।।2।। भगवत सन्त रूप इक जानो, तास वचन निष्चय कर मानो।।3।। इस विध आरती आतुर कीजे, दर्षनराम भव बन्धन छीजे।।4।।

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श्री दयारामजी महाराज की आरती

श्री दयारामजी महाराज की आरती आरती राम निरंजन थारी, किया होय जग जीव सुख्यारी।।टेर।। प्रथम जीव गुरू शरणे आवे, राम निरंजन रसना गावे।।1।। गुरू उपदेष राम परतापा, मिटे सकल भव भय सन्तापा।।2।। तबही जीव सुखिया होई जावे, जनम मरण सब रोग बिलावे।।3।। आरती राम गुरां की करी है, दयाराम तन फेर न धरि है।।4।।

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श्री धर्मदासजी महाराज की आरती

श्री धर्मदासजी महाराज की आरती आरती अलख पुरूष की कीजै, तनम न लाय चरण चित दीजे।।टेर।। अलख होय सो दृष्टि न आवे, बिन देख्यां कैसे मन लावे।।1।। सत गुरू शरण जीव जब जावे, ज्ञान, पाय अज्ञान मिटावे।।2।। आतम ज्ञान उदय होई आई, पावे अलख पुरूष घट मांई।।3।। अलख नाम सोही राम कहावे, षिव सनकादिक तांकू

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श्री दिलषुद्ध महाराज की आरती

श्री दिलषुद्ध महाराज की आरती आरती राम गुरू की करना, सुरति निरति निज पद में धरना।।टेर।। आरती रसन राम मुख गाओ, काम क्रोध दिल दूर हटाओ।।1।। रसन रटत रस अमृत पीया, नाभि कमल में शब्द समाया।।2।। उलट जाय त्रिवेणी न्हाया, चैथी धाम परम पद पाया।।3।। अरस परस मिल सेवक स्वामी, निज सुख मांही पडे नहीं

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श्री दूल्हेराम जी महाराज की आरती

श्री दूल्हेराम जी महाराज की आरती आरती राम चितानंद तेरी, सचराचर में व्यापक हेरी।।टेर।। रूप न रेख वरण से न्यारा, ऐसा स्वामी राम हमारा।।1।। पूरब रसना रटण लगाई, भरम करम सब गया है बिलाई।।2।। द्वितीये प्रेम उर उदय कराई, पी अमृत मन मगन रहाई।।3।। गया है द्वंद निद्र्वन्द घर पाया, अगम चिन्ह गति शब्द लखाया।।4।।

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श्री हरिदास जी महाराज की आरती

श्री हरिदास जी महाराज की आरती आरती राम गुरूजन केरी, तन मन धन सब वांरू फेरी।।टेर।। देही देवल माहि अमूरत, ताकी सेव करे नित सुरति।।1।। आरती सूंल बनाऊं नीकी, वस्तु अनुपम धरहुं नजीकी।।2।। द्वीप द्वीप सातों परकाषा जांके अन्तर माहि उजासा।।3।। झालर घंट कंठ मध बाजे, शब्द अनाहद अद्भुत गाजे।।4।। शंक निषंक होय गुण गाउं,

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श्री हिम्मतराम जी महाराज की आरती

श्री हिम्मतराम जी महाराज की आरती टारती कीजे रामनिरंजन, ज्ञान नीर करिये मन मंजन।।टेर।। कर विचार दीपक उर अन्दर, मिटे तिमिर दर्षे सुख सुन्दर।।1।। चित चंदन चेतन चर्चावे, घण्टा अनहद शब्द बजावे।।2।। नित्य नियम नैवेद्य समर्पण, करो सकल यूं आतम अरपण।।3।। पाय परम पद अचल अनूपा, भये दास स्वामी तद्रूपा।।4।। हिम्मतराम यह आरती गावे, जन्म

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श्री जगरामदासजी महाराज की आरती

श्री जगरामदासजी महाराज की आरती आरती अलख निरंजन तेरी, तुम चरणों में लज्जा मेरी।।टेर।। बहु अपराध पार नहीं स्वामी, सो सब जानों अन्तर्यामी।।1।। जन्म अनेक भरम में आयो, किरपा कर मोही शरण लगायो।।2।। बिरद् रावरो कहां लग वरणूं, शीव सनकादिक करि है निरणु।।3।। जगरामदास यह आरती गावे, तुमरे चरण कमल चितलावे।।4।।

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श्री नारायण दास जी महाराज की आरती

श्री नारायण जी महाराज की आरती आरती कीजे अन्तर माही, बाझी भरम सब दूर बिलाही।।टेर।। किस विधि आरती कीजे जांकी, मूरति दृष्टि पडे नहीं तांकी।।1।। मन मन्दिर मंें सुन्दर ज्योति, शब्द अनाहद जहां ध्वनि होती।।2।। जांके अंग न संग न रंगा, सब घट पूरण एक अभंगा।।3।। नारायणदास यह आरती गावे, गुरू ब्रह्म जन एक लखावे।।4।।

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श्री निर्भयराम जी महाराज की आरती

श्री निर्भयराम जी महाराज की आरती आरती अलख पुरूष अविनाषी, सेवत तांहि सकल दुःख जाषी।।टेर।। प्रथम रसन रट अमृत पीजे, तज अवगुण गुण को गह लीजै।।1।। शील दया समता उर धारो, गुरू की आज्ञा कबहु न टारो।।2।। रहे अचाहि वृति निराषा, गह सर्वज्ञ राम विष्वासा।।3।। इस विधि आरती जो कोई करि है,       निर्भयरााम तन फेर

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श्री रामजन्न जी महाराज की आरती

श्री रामजन्न जी महाराज की आरती आरती तेरी अन्तरयामी, पूरण ब्रह्म राम घण नामी।।टेर।। कारण सबको करूणासागर, ध्यावे ताही मिटे दुःख आगर।।1।। होय सुख्यारी थारी शरणा, करूणाकर मेटो मम मरणां।।2।। कीरती रसना राम उचारूं, एक पति-व्रत उरमें धारू।।3।। अनन्त लोक ब्रहमाण्ड अनंता, तुमरो वार पार नहीं अंता।।4।। ऐसे स्वामी राम हमारे, रामजन्न को पार उतारे।।5।।

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